पांचवें दिन मंचित हुआ भावुक ‘भरत मिलाप’, गूंजा ‘भरत जैसा भाई हो’ का जयघोष
डोईवाला: स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (एसआरएचयू) जौलीग्रांट में चल रहे रामलीला महोत्सव के पांचवें दिन भरत-शत्रुघ्न आगमन, भरत मिलाप और शूर्पणखा नासिका छेदन समेत कई प्रमुख प्रसंगों का भव्य मंचन किया गया।
मुख्य आकर्षण:
भरत मिलाप: ननिहाल से लौटे भरत और शत्रुघ्न ने जब पिता दशरथ के देहांत और श्रीराम के वनवास का समाचार सुना, तो वे फूट-फूटकर रो पड़े। भरत ने माता कैकेयी को धिक्कारते हुए अयोध्या की राजगद्दी लेने से साफ़ इनकार कर दिया।
चित्रकूट प्रसंग: भरत गुरु वशिष्ठ और अयोध्यावासियों के साथ राम को मनाने चित्रकूट पहुँचे। दोनों भाइयों का मिलन देख पूरा पंडाल भावुक हो उठा। भरत ने श्रीराम की चरण पादुकाएं सिर पर रखकर अयोध्या लौटने और राज्य चलाने का संकल्प लिया।
शूर्पणखा प्रसंग व खर-दूषण वध: पंचवटी में सीता जी पर झपटने पर लक्ष्मण ने शूर्पणखा के नाक-कान काट दिए। इसके बाद खर-दूषण के आक्रमण करने पर प्रभु श्रीराम ने अकेले ही उनका वध कर दिया। अंत में रावण दरबार का दृश्य दिखाया गया, जहाँ शूर्पणखा ने रावण को सीता हरण के लिए उकसाया।
आगामी कार्यक्रम:
रामलीला के छठे दिन (16 अक्टूबर) बूढ़ा मारीच प्रसंग, साधु वेश में रावण, सीता हरण, शबरी भक्ति, हनुमान अवतरण और सुग्रीव दरबार की लीलाओं का मंचन किया जाएगा।
